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कारगिल से हरियाली तक: एक फौजी-पुलिसकर्मी की समाज और पर्यावरण सेवा की विशाल

कारगिल से हरियाली तक: सोनीपत पुलिस लाइन के बीचो-बीच पेड़ों की हरियाली, चहचहाते पक्षी और व्यायाम करती आवाज़-यह सब एक जुनूनी पुलिसकर्मी की मेहनत और समर्पण का नतीजा हैं। पवन कुमार औहल्याण, जो कभी सेना के जवान रहे और अब हरियाणा पुलिस में सहायक उप निरीक्षक के पद पर सेवा दे रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन को समाज और पर्यावरण की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। उनका जीवन बताता है कि एक व्यक्ति की लगन पूरे समाज को बदल सकती है।

सेवा और समर्पण की मिसाल: पवन कुमार औहल्याण का जीवन (कारगिल से हरियाली तक)

हरियाणा के रोहतक जिले के गांव मोरखेडी निवासी पवन कुमार औहल्याण का जन्म 25 सितंबर 1976 को एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनके जीवन की पहली और सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी माता, रामरती देवी हैं। विद्यालय की शिक्षा से वंचित होने के बावजूद भी उन्होंने अपने बेटों में संस्कारों और मानवता की भावना भरी। इन्हीं संस्कारों ने उन्हें पर्यावरण संरक्षण, पक्षी सेवा, बुजुर्गों की देखभाल और बच्चों के लिए व्यायाम शालाएं बनाने की दिशा में प्रेरित किया।

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सेवा में सेवा और कारगिल विजय

पवन कुमार औहल्याण ने साल 1997 से 2002 तक भारतीय सेवा में सेवा दी। 1999 में उन्हें कारगिल विजय ऑपरेशन में भाग लेने का गौरव प्राप्त हुआ। सेवा में मिली अनुशासन और सेवाभाव ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

समाज सेवा के प्रति योगदान देने वाले ने जब हाथ में त्यागे प्राण

सन् 2002 में सेना के आर एण्ड आर हस्पताल में जब पवन कुमार उपचाराधीन थे। तब रामचन्द गुप्ता बीए बीटी जो जम्मू कठुआ के रहने वाले थे। तब वह भी अपने उपचार के लिए अस्पताल में दाखिल थे। तब साथ में उनकी भी सेवा करने का शुभ अवसर उन्हें मिला। उस समय उनके द्वारा दी गई शिक्षा और अपने अनुभव जो उन्होंने पवन कुमार के साथ सांझा किए। उनका बहुत बड़ा योगदान उनके जीवन में समाज सेवा के प्रति प्रेरित करने वाला रहा है। जिन्होंने 94 साल की आयु में मेरे हाथों में ही प्राण त्यागे थे।

पुलिस सेवा और परिवार की जिम्मेदारी

भारतीय सेवा के बाद 2003 में उन्होंने हरियाणा पुलिस में कार्यभार संभाला। वर्ष 2009 में उनके बड़े भाई का आकस्मिक निधन उनके लिए बड़ी व्यक्तिगत चुनौती बन गया। उसे कठिन समय में उन्होंने संकल्प लिया कि वह भाई की जिम्मेदारी भी निभाएंगे। आज उनके परिवार में माता-पिता, भाभी, भाई की एक बिटिया, उनकी धर्मपत्नी और तीन बच्चे हैं।

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जब पूर्व मुख्यमंत्री को भेट किया चिड़िया का घोंसला (कारगिल से हरियाली तक)

भूतपूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खटटर ने सन् 2021 में जिला झज्जर में 36 एकड़ में बहुत बड़ा पौधारोपण अभियान चलाया गया था। तब उनसे पौधारोपण करवाया गया और पवन कुमार ने उन्हें घोंसला उपहार स्वरूप भेंट किया गया था। सोनीपत जिला में 15 अगस्त और 26 जनवरी के कार्यक्रम आने वाले हर मुख्य अतिथि को व जिला प्रशासन के अधिकारियों को पक्षी विहार प्रेरणा केन्द्र में पक्षियों को दाना डलवाकर सबको चिड़िया का घोंसला उपहार स्वरुप अपने अपने घरों में लगाने के लिए दिया जाता है।

पर्यावरण और वृक्षारोपण का कार्य

2012 में उनकी तैनाती सोनीपत पुलिस लाइन में हुई। वहां पेड़ों की संख्या लगभग शून्य थी। पवन कुमार औहल्याण ने इसे देखा और निर्णय लिया कि वह हरियाली फैलाएंगे। उन्होंने लगातार वृक्षारोपण किया और आज पुलिस लाइन में लगभग 3500 पेड़ लगा चुके हैं।

पक्षी विहार प्रेरणा केंद्र

वर्ष 2017 में उन्होंने पुलिस लाइन में पक्षी विहार प्रेरणा केंद्र की स्थापना की। इस केंद्र के माध्यम से हजारों पक्षियों को सुरक्षित वातावरण मिला और उन्हें खुले आसमान में उड़ने का अवसर मिला। यह पल न केवल पक्षियों के लिए बल्कि समाज के लिए भी जागरूकता का संदेश बन गई।

बुजुर्ग और बच्चों के लिए सेवा

2021 में उन्होंने केंद्र के साथ बुजुर्गों के लिए एक स्थान बनाया। यहां 40 से 50 बुजुर्ग रोजाना बैठते हैं और पुलिस कर्मचारी अपनी ड्यूटी के बाद यहां आकर तनाव दूर करते हैं।

2023 में उन्होंने बच्चों के लिए अखाड़ा बनाया, जहां पुलिसकर्मी, उनके बच्चे और गरीब बच्चे व्यायाम कर सकते हैं। हाल ही में बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण किया गया, जिसमें बच्चों को अभ्यास के लिए सुरक्षित स्थान मिला।

पेशेवर जिम्मेदारियां (कारगिल से हरियाली तक)

2014 से पवन कुमार औहल्याण समान और वारंट तामील करवाने के लिए कार्य में लगे हुए हैं। पंजाब और जम्मू कश्मीर में आने वाले लोगों की बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से लेकर अदालत तक सुविधा सुनिश्चित करने के साथ उन्होंने पर्यावरण और पक्षी संरक्षण के महत्व के बारे में भी जागरूक किया।

समाज के प्रति संदेश

पवन कुमार औहल्याण ने अभी तक 30,000 से ज्यादा गौरैया के घोसले लगाए हैं। उन्हें हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सम्मानित भी किया था। उनका मानना है कि समाज के लिए काम करना जीवन का वास्तविक उद्देश्य है। वह युवाओं को नकारात्मक विचारों की परवाह किए बिना सेवा और समाज के लिए काम करने की प्रेरणा देते हैं।

जीवन का दर्शन

उनके लिए जीवन का आनंद केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं है। बल्कि, उनका उद्देश्य और विश्वास है कि जैसा हम अपने लिए चाहते हैं वैसा ही समाज के लिए करना चाहिए। यही उनके जीवन का सबसे बड़ा सिद्धांत और सबसे बड़ी सीख है।

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