क्राइम

महिलाओं के लिए भारत कितना सुरक्षित? बलात्कार के मामलों का सच

हमारे देश में सख्त कानून होने के बाद भी रेप के मामलों में कोई कमी नहीं हुई है। भारत में महिलाओं की सुरक्षा सवाल खड़े करने वाली है। साथ ही सजा की दर यानी कनविक्शन रेट भी नहीं बढ़ा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में हर घंटे तीन महिलाएं रेप का शिकार होती हैं। विस्तृत रूप से हमारे देश में हर 20 मिनट में एक रेप की घटना होती है। इसके अलावा रेप के मामलों में 96% से ज्यादा आरोपी पीड़ित महिला को जानने वाले होते हैं। एक रिसर्च पेपर में यह सब जानकारी दी गई है जिसमें यह भी बताया गया है की 100 में से 27 आरोपियों को ही सजा होती है। बाकी के आरोपी बारी हो जाते हैं। 

भारत में महिलाओं की सुरक्षा आंकड़ों के अनुसार

केंद्र सरकार की एजेंसी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो(NCRB Report) के आंकड़ों के अनुसार ऊपर बताई गई बातें लिखी गई है। NCRB के अनुसार पूरे साल में महिलाओं के खिलाफ अपराध के चार लाख से भी ज्यादा अपराध दर्ज किए जाते हैं। इन सभी अपराधों में केवल रेप ही नहीं, इसके अलावा छेड़छाड़, दहेज के लिए हत्या, एसिड अटैक, ट्रैफिकिंग, किडनैपिंग जैसे जगन ने अपराध भी शामिल है। 

अनगिनत कानून होते हुए भी नहीं घट रही अपराधों की संख्या

12 साल पहले 16 दिसंबर 2012 की रात देश की राजधानी दिल्ली में सड़क पर चलती बस में युक्ति के साथ गैंगरेप किया गया था। इस कांड ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। ऐसा लगा था कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होगी। लेकिन 12 साल के बाद भी भारत में महिलाओं की सुरक्षा के हालात नहीं बदले हैं। बलात्कार की घटनाओं में कमी नहीं आई है और ना ही आरोपियों को सही से सजा मिल रही है। 

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आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 से पहले हर साल रेप के औसतन 25,000 मामले दर्ज किए जाते थे। लेकिन इसके बाद यह आंकड़े 30,000 के ऊपर पहुंच गए। साल 2013 में ही 33 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए गए थे। 2016 में आंकड़ा 39 हजार के करीब पहुंच गया था। 

इन राज्यों में रेप के सबसे ज्यादा मामले

राज्यों पर ध्यान दिया जाए तो रेप के सबसे ज्यादा मामले राजस्थान में है। 2022 में राजस्थान में रेप के 5,399 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं दूसरे नंबर पर 3,690 मामलों के साथ उत्तर प्रदेश था। हैरान करने वाली बात यह है की बलात्कार में लगभग सभी आरोपी पीड़िता की जान पहचान वाले ही होते हैं। 

2022 में 31 हजार 516 मामले दर्ज किए गए थे,  इनमें से 3,514 मामलों में आरोपी पीड़िता के जानने वाला ही था।  इनमें से भी 2,324 पीड़िता के परिवार के सदस्य ही थे। सोशल मीडिया कैसे अपराधों का मीडिया बन रहा है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इन मामलों में से 14 हजार 582 मामलों में सोशल मीडिया से जुड़े ऑनलाइन फ्रेंड,  लिव- इन पार्टनर और शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने वाला आरोपी था। साथ ही 13 हजार 548 मामले ऐसे थे, जिनमें अपराधी पड़ोसी या पारिवारिक दोस्त ही था। 

हालांकि, यह सभी मामले बेहद खौफनाक और डराने वाले हैं। लेकिन हमें बिना डरे अपने हक की लड़ाई को लड़ना होगा। इसके अलावा अपने आसपास मौजूद छोटी बच्चियों और अन्य महिलाओं को भी शिक्षित करना होगा। हमारे देश को आजाद हुए भले ही 77 वर्ष हो गए हैं। यह हर्ष की बात है लेकिन, हमारे देश का अपराध मुक्त होना भी बेहद जरूरी है।

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