Khatima: दंडवत करते हुए खटीमा से पूर्णागिरि धाम जा रहा श्रद्धालु
Khatima: खटीमा में भक्ति का अनोखा रूप देखने को मिला है। जहां पर दंडवत करते हुए युवक मां पूर्णागिरि धाम के दर्शन के लिए निकला है। दरअसल, प्रेम शंकर कश्यप नाम के व्यक्ति 11 दिनों में खटीमा पहुंचे हैं। इसमें उनका परिवार भी साथ दे रहा है।
आस्था की बड़ी मिसाल (Khatima)
यह व्यक्ति वर्तमान में आस्था की बड़ी मिसाल बना हुआ है। आस्था और श्रद्धा का एक अनोखा संगम सभी को देखने को मिल रहा है। श्रद्धालु जमीन पर लेट-लेटकर मां पूर्णागिरि धाम की यात्रा कर रहा है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के निवासी प्रेम शंकर कश्यप पिछले कुछ समय से खटीमा में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि माता पूर्णागिरि से उनका खास लगाव है। मां के प्रति उनकी अनोखी आस्था है जो उन्हें ऐसा करने की हिम्मत भी दे रही है।
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परिवार भी दे रहा साथ
प्रेम शंकर कश्यप 19 मार्च को अपने घर से निकले थे और 11 दिनों की यात्रा के बाद खटीमा पहुंचे। इस पूरी यात्रा में उनका परिवार भी उनके साथ पूर्ण रूप से दे रहा है। उनकी पत्नी और बच्चे उनके साथ चल रहे हैं और हर परिस्थिति में सहयोग भी कर रहे हैं। वह प्रतिदिन लगभग 6 से 7 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं। कड़कती धूप और मौसम की कठिन परिस्थितियों के बावजूद भी उनका संकल्प मजबूत है।
रात के दौरान क्या करते हैं? (Khatima News)
अपनी यात्रा में वह रात के दौरान किसी मंदिर या सुरक्षित स्थान पर विश्राम करते हैं। स्थानीय लोग भी उनकी हर संभव सहयोग और सहायता कर रहे हैं। प्रेम शंकर कश्यप की अनोखा कठिन यात्रा लोगों के बीच एक चर्चा का विषय है। उन्हें आस्था के मामले में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
खटीमा से काफी दूर मंदिर
पूर्णागिरी मंदिर उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित है खटीमा से इसकी दूरी लगभग 20 से 25 किलोमीटर मानी जाती है। जिसका अंतिम हिस्सा पहाड़ी चढ़ाई वाला होता है। सामान्य यात्रा सड़क और पैदल मार्ग से 4 से 6 घंटे में पूरी हो सकती है। लेकिन जिस तरह से प्रेम शंकर कश्यप दंडवत करते हुए जा रहे हैं तो यात्रा बेहद कठिन और समय लेने वाली बन गई है। हर कदम पर शरीर को झुकाना, उठना और आगे बढ़ना पड़ता है। जिससे शारीरिक थकान, दर्द और धैर्य की परीक्षा होती है। ऐसी यात्रा पूरी करने में कई दिन लग सकते हैं और इसके लिए मजबूत इच्छा शक्ति का होना आवश्यक है।
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कहां है पूर्णागिरी मंदिर? (Khatima News Latest)
पूर्णागिरी मंदिर उत्तराखंड के चंपावत जिले में टनकपुर के पास अन्नपूर्णा शिखर पर स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यह मंदिर शारदा नदी जिसे काली नदी कहा जाता है के तट पर स्थित है। 51 शक्ति पीठ में से एक पूर्णागिरी मंदिर भी है। जहां देवी सती का नाभी भाग गिरा था। यहां पहुंचने के लिए टनकपुर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इसके बाद थुलीगढ़ से पदयात्रा करनी होती है।

