Khatima Tharu Holi: खटीमा में जिंदा और मरी होली का आयोजन
Khatima Tharu Holi: उत्तराखंड के उधमसिंह नगर के खटीमा इलाके में थारू जनजाति द्वारा होली आयोजित की जा रही है। खटीमा के ब्लॉक परिसर में ब्लॉक प्रमुख द्वारा थारू होली मा महोत्सव का आयोजन किया गया है। जिसमें थारू जनजाति समाज के प्रमुख सांस्कृतिक दलों ने भाग लिया है। खटीमा में मौजूद थारू जनजाति पूरे देश में केवल एकमात्र ऐसी है जो होली पर्व को जिंदा और मरी होली के रूप में बनाती है।
थारू होली महोत्सव का आयोजन (Khatima Tharu Holi)
पूरे प्रदेश में भले ही होली बहुत दिनों पहले समाप्त हो चुकी है। लेकिन, उत्तराखंड की थारू जनजाति की होली अभी मनाई जा रही है। जिसमें थारू जनजाति के पारंपरिक गीतों और नृत्य का जोरदार प्रदर्शन होता है। सुबह से लेकर देर रात तक यह आयोजन चलता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भी इस आयोजन में आने की संभावना थी लेकिन किन्हीं कारणों की वजह से ऐसा नहीं हो पाया।
यह भी पढ़ें: Jyoti Adhikari News: ब्लॉगरों की लड़ाई बनी तीन पुलिसकर्मियों के लिए सर दर्दी
क्या है मरी होली?
थारू जनजाति के थारू होली (tharu holi khatima) महोत्सव के आयोजन ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि रविंद्र राणा ने जानकारी दी की थारू जनजाति में होली पर्व को होलिका दहन से 15 दिन पहले जिंदा होली पर होलिका दहन के 15 दिन बाद तक मरी होली के रूप में मनाया जाता है। अपनी इस संस्कृति को बचाने के लिए अभी भी थारू जनजाति के लोग हर्षोल्लास के साथ खटीमा ब्लॉक परिसर में थारू होली महोत्सव मनाते हैं। जिसमें थारू जनजाति के विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने जनजाति समाज की प्रमुख होली नृत्य और गीतों को गाकर त्यौहार मनाया।
यह भी पढ़ें: Haridwar: जीजा और साली मिलकर चला रहे थे सेक्स रैकेट! हुआ भंडाफोड़
भक्ति गीत का चलन (Khatima Tharu Holi News)
जनजाति समाज में टोलियां बनाकर लोग गांव में घूमते हैं। साथ ही राधा कृष्ण और शिव भगवान के धार्मिक भजन गाते हैं। ब्लॉक प्रमुख ने जानकारी दी की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खटीमा विधायक काल के दौरान यह परंपरा विलुप्त हो रही थी। लेकिन, इसके संरक्षण के लिए उन्होंने उस वक्त जनजाति समाज को पारंपरिक वस्त्र दिए और इस संस्कृति को खटीमा के विभिन्न इलाकों में आयोजित करने की बात कही। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी फोन के जरिए इस आयोजन में जुड़े और सभी को शुभकामनाएं दी।
