Uttarakhand: विभिन्न न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ 258 शिकायत हुई प्राप्त
Uttarakhand Highcourt: उत्तराखंड उच्च न्यायालय से संबंधित एक बड़ी जानकारी सामने आई है। दरअसल, उत्तराखंड कैडर के आईएफएस संजीव चतुर्वेदी ने एक RTI के तहत जानकारी के लिए आवेदन किया गया था। जिसके जवाब में यह बताया गया है कि 1 जनवरी 2020 से लेकर 15 अप्रैल 2025 तक, विभिन्न न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ 258 शिकायत प्राप्त हुई है। इनमें से चार मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई।
क्या है पूरा मामला? (Uttarakhand)
दरअसल, इस बात का खुलासा राज्य सूचना आयोग ने आईएफएस संजीव चतुर्वेदी की दूसरी अपील पर सुनवाई करते हुए किया। जब उच्च न्यायालय के राज्य लोक सूचना अधिकारी की तरफ से निजता अधिकारों के अतिक्रमण के दावों को खारिज किया गया। इस मामले में 1 जनवरी को पारित आदेश में, राज्य सूचना आयोग ने उच्च न्यायालय के राज्य लोक सूचना अधिकारी को एक महीने की समय सीमा दी। जिसके अंतर्गत उन्हें संजीव चतुर्वेदी को जरूरी जानकारी प्रदान करने और अनुपालन रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया था।
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न्यायिक अधिकारियों के भ्रष्टाचार संबंधित मामले
देश के अलग राज्य जैसे छत्तीसगढ़, दिल्ली और चेन्नई जैसे ही कई दूसरे हाईकोर्ट ने आरटीआई के तहत निचली अदालत में अधिकारियों के भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों की जानकारी देने से इनकार कर दिया था। दूसरी ओर उत्तराखंड हाईकोर्ट अधीनस्थ न्यायपालिका के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी देने वाला देश का पहला उच्च न्यायालय बन गया है।
हाईकोर्ट का निर्णय बना बड़ी मिसाल (Uttarakhand News)
पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट का यह निर्णय एक बड़ी मिसाल बन गया है। इसके अलावा दूसरे मामले में भी हाईकोर्ट द्वारा निर्णय दिया गया है कि केवल वही सूचना अपवर्जित है जिसे कोर्ट प्रकाशित करने से रोके या फिर जो कोर्ट की अवमानना का कारण बने।
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कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर उत्तराखंड सरकार (uttarakhand news today) की तरफ से दायर की गई रिट याचिका को खारिज किया। साथ ही स्पष्ट किया की सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8 के तहत केवल वही सूचना अपवर्जित होती है जिसे किसी भी न्यायालय या अधिकरण की ओर से स्पष्ट रूप से प्रकाशित करने से रोका गया हो। या फिर जिसका खुलासा कोर्ट की अवमानना का कारण भी बन सकता है।

