Mental Health: सोशल मीडिया युवाओं में मानसिक तनाव की वजह
Mental Health: ऋषिकेश एम्स के विशेषज्ञों ने युवाओं पर अध्ययन किया है। जिसमें विशेषज्ञ का कहना है कि युवाओं की सफलता को केवल अंकों और उपलब्धियां से नहीं बल्कि उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य से अपनाने की जरूरत है। वर्तमान समय में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सोशल मीडिया के दबाव के कारण युवा गहरे मानसिक संकट में है। स्थिति ऐसी बन गई है कि मेडिकल इंजीनियरिंग जैसे प्रतिष्ठानों में पढ़ने वाले युवा भी आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं।
सोशल मीडिया मानसिक तनाव की वजह (Mental Health)
यह अध्ययन एम्स के सोशल आउटरीच से स्पष्ट हुआ है। जिसके एसोसिएट प्रोफेसर संतोष ने जानकारी दी है कि वह युवा जोश कार्यक्रम के तहत 7000 से ज्यादा छात्राओं के बीच अभियान चला चुके हैं। जिससे यह बात साफ हुई है कि सोशल मीडिया ने युवाओं के बीच मानसिक तनाव के संकट को बढ़ा दिया है।
यह भी पढ़ें: Uttarakhand News: सरकारी लेखागार में जरूरी दस्तावेज गायब! विभाग में हड़कंप
युवाओं के बीच असुरक्षा और हीनता की भावना
अक्सर सोशल मीडिया पर युवा दूसरों की जिंदगी की सफलताएं देखते हैं। चमक धमक देखते हैं। ऐसा होने पर वह अपनी तुलना उनसे करने लग जाते हैं। जिसकी वजह से युवाओं के अंदर हीन भावना और असुरक्षा और तनाव बढ़ रहा है। दिक्कत इस बात की है कि इस तनाव से निपटने के प्रभावित तरीकों की कमी के कारण यह स्थिति और ज्यादा खराब हो गई है। डॉक्टर ने बताया कि जब भी वह किसी शिविर या अन्य कार्यक्रम में जाते हैं तो अधिकांश युवाओं को करियर की चिंता, पारिवारिक अपेक्षाएं और प्रेम प्रसंग आदि के कारण मानसिक तनाव रहता है।
यह भी पढ़ें: Khatima History: खटीमा का इतिहास! जंगल से शहर तक का चौकाने वाला सफर
मौन आपातकाल की हकीकत (Youth Mental Health)
शोध से पता चला है कि देश के विश्वविद्यालय के छात्रों में तनाव की दर 25फीसदी तक पहुंच गई है। केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 से 2023 के बीच आईआईटी, एनआईटी और आईआईएम जैसे बड़े संस्थानों में 60 छात्रों ने आत्महत्या की थी। इसके अलावा एम्स और अन्य मेडिकल संस्थानों में डॉक्टरों व रेजिडेंस के बीच यह आंकड़ा 130 तक पहुंच गया है। यह संकट तब तक खत्म नहीं होगा जब तक शिक्षा व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक अपेक्षाओं को लेकर संतुलन नहीं बनाया जाएगा।

