Dehradun News: घंटाघर की धड़कन वापस! निर्माण को लेकर हुआ था खूब विवाद
Dehradun News: देहरादून के धड़कन कहे जाने वाला घंटाघर में फिर से जान आ गई है। घड़ी अब फिर से सही समय बताने लगी है। बीते कुछ समय से घड़ी की सुई रूक गई थी। गलत समय दिखाने की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने तत्काल रूप से कार्रवाई की है।
मरम्मत के लिए स्वीकृत की धनराशि (dehradun news)
जिलाधिकारी सविन बंसल ने घड़ी की मरम्मत के लिए जरूरी धनराशि स्वीकृत की। उन्होंने इस कार्य के लिए चेन्नई की विशेषज्ञ फर्म इंडियन क्लॉक को जिम्मेदारी सौंप थी। फर्म के इंजीनियरों ने जांच के दौरान पाया की घड़ी की वायर, लाउडस्पीकर, जीपीएस और बैल सिस्टम खराब हो चुका था। इन सभी हिस्सों को बदलने के लिए घड़ी को पूरी तरह से दुरुस्त कर दिया गया है।
यह भी पढ़ें: Rishikesh Temple: योग नगरी स्थित 300 साल पुराने हनुमान मंदिर का इतिहास
दोबारा से सुनाई दे रही धड़कन
घंटाघर की घड़ी समय सही बता रही है और इसकी धड़कन भी लोगों को दोबारा सुनाई दे रही है। इससे पहले जिला प्रशासन ने घंटाघर के सौंदर्यीकरण का कार्य भी पूरा कराया था। जिसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता को समर्पित किया था।
घंटाघर का रोचक इतिहास (dehradun latest news)
देहरादून का घंटाघर इतना प्रसिद्ध है कि कोई इसकी फोटो देखते ही शहर और राज्य का नाम तुरंत बता देगा। यह शहर की पहचान के साथ-साथ देहरादून की धड़कन भी है। वर्तमान समय में जहां घंटाघर है वहां पुराने समय में पानी की दो टंकी और तांगा स्टैंड हुआ करता था। लाला बलबीर न्यायाधीश एवं शहर के जाने-माने रईस थे। 22 सितंबर 1936 को उनकी मृत्यु हो गई थी।
उनकी पत्नी मनभरी देवी और पुत्र आनंद सिंह थे। आनंद सिंह ने अपने स्वर्गीय पिता की स्मृति में बलबीर क्लॉक टावर निर्माण का प्रस्ताव सिटी बोर्ड को दिया था। उस दौरान आनंद स्वरूप गर्ग सिटी बोर्ड के अध्यक्ष थे। प्रतिष्ठा की आपसी प्रतिद्वंद्विता के चलते शहर के दूसरे रईसों को यह बात अच्छी नहीं लगी कि किसी दूसरे अमीर की स्मृति में इस शहर में क्लॉक टावर का निर्माण हो रहा है।
यह भी पढ़ें: Cancer Awareness: इग्नोर ना करें बच्चों में यह बदलाव! हो सकता है कैंसर
क्लॉक टावर बनने के दौरान विवाद
प्रतिद्वंद के चलते घंटाघर के निर्माण में भूमि का स्वामित्व, ठेकेदार की कोटेशन (dehradun news today) तांगा चालकों का विवाद और अन्य कर्म को लेकर निर्माण रोकने के लिए तरह-तरह की रुकावटें खड़ी की। तत्कालीन जिलाधिकारी और सुपरीटेंडेंट आफ दून दृढ़ रहे। सिटी बोर्ड अध्यक्ष आनंद स्वरूप गर्ग नगर की सुंदरता के लिए इस निर्माण के पक्षधर थे। उन्होंने इन तमाम दुविधाओं को सुलझाते हुए आनंद सिंह को सलाह दी कि वह इस निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश की तत्कालीन गवर्नर सरोजिनी नायडू को तैयार करें तो सारी अर्चना खुद समाप्त हो जाएगी। ऐसा ही हुआ सरोजिनी नायडू ने इस जगह का शिलान्यास किया था।

