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Uttarkashi News: बिना वजह प्रधानाध्यापक ने पांच बच्चों को स्कूल से निकाला

Uttarkashi News: उत्तरकाशी के मदेश में राजकीय प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने उन्हें स्कूल से बाहर कर दिया है। बताया जा रहा है कि वह बच्चे स्कूल काम आते थे तो उनके साथ प्रधानाध्यापक ने ऐसा किया। इस पूरे मामले में करीब 2 साल बाद उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मुख्य शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी से इसी महीने में विस्तृत जाँच रिपोर्ट पर ध्यान केंद्रित कर दोषियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी की मांग की है। बच्चों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उन्हें बिना सूचना के ही उनके बच्चों को टीसी थमा दी गई थी।

बिना वार्तालाप के इतना बड़ा फैसला (Uttarkashi News)

पांच बच्चों के परिजनों ने बताया कि बड़कोट तहसील के राजकीय प्राथमिक विद्यालय मदेश में जुलाई 2023 में विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने पांच बच्चों को स्कूल से हटा दिया था। इसकी मुख्य वजह थी कि वह स्कूल कम आते थे। प्रधानाध्यापक ने बच्चों के अभिभावकों को उनके बच्चों की टीसी थमा दी। परिजनों ने आरोप लगाया है कि इस मामले को लेकर उन्हें ना तो कोई जानकारी दी गई और ना ही कोई वार्तालाप किया गया।

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शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

यह पूरी घटना शिक्षा व्यवस्था प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। स्कूल से बाहर किए गए पांचो बच्चों के अभिभावकों ने इस संबंध में उप जिलाधिकारी बड़कोट के माध्यम से शिक्षा विभाग को शिकायत दर्ज कराई थी। हरकत करते हुए विभागीय स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारी से जांच कराई गई। जिसमें यह तथ्य सामने आया कि पांचों बच्चों के नाम बिना किसी वैध कारण और सूचना के विद्यालय से हटा दिए गए थे। इस बात की पुष्टि जांच रिपोर्ट में भी की गई है।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक पहुंचा मामला (Uttarkashi News Today)

इस पुष्टि के बाद यह मामला बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक पहुंच गया है। जिन्होंने इस घटना को बच्चों के शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन माना और मुख्य शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी से इस पूरे प्रकरण में की गई कार्रवाई का विवरण और जिम्मेदारों के खिलाफ उठाए गए कदमों की रिपोर्ट मांगी है।

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बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़

एक तरफ जहां पहाड़ी इलाकों में रहने वाले बच्चों को सीमित शिक्षा और अनुभव मिलता है। दूसरी तरफ ऐसी घटनाएं होने से उनका भविष्य बिल्कुल अंधकार में चला जाएगा। यह संवेदनहीनता का एक बहुत बड़ा उदाहरण है। गनिमत रही कि बच्चों के परिजनों ने उनका अन्य स्कूलों में दाखिला करवा दिया था। लेकिन, इस दौरान बच्चों और परिजनों दोनों का मूल्यवान समय बर्बाद हुआ। साथ ही बच्चों को भी नए स्कूल और सहपाठियों के साथ घुलने मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ गया। इस मामले को लेकर मुख्य शिक्षा अधिकारी अमित कोटियाल ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। यदि उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के ओर से पत्र आता है तो इस मामले में कार्यवाही की जाएगी।

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