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Haridwar: क्यों मनाई जाती है गंगा दशहरा? जानिए महत्त्व

Haridwar: आज हर की पौड़ी में गंगा दशहरा के पर्व पर स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है। ऐसा माना जाता है कि गंगा दशहरा पर किया गया स्नान 10 पापों का नाश करता है। हरिद्वार के अलावा गंगोत्री धाम में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है। प्रसिद्ध गंगोत्री धाम मंदिर में सुबह से ही वैदिक उच्चारण और हर-हर गंगे के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज रहा है।

क्यों मनाई जाती है गंगा दशहरा? (Haridwar News)

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां गंगा विष्णु लोक में जन्मी। ब्रह्मलोक में बही और भागीरथी के तट से भगवान शंकर की जटाओं में समाई थी। गंगा दशहरा के दिन पर्वतों से उतरकर पहली बार गंगा जी ने दशहरा के दिन मैदान में प्रवेश किया था। तभी से गंगा आगमन का पर्व हर साल हरिद्वार में मनाया जाता है। गंगा स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु आज हरिद्वार में आए हुए हैं।

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ऋषि श्रृंगी का संकल्प

आज सुबह 9:06 से कन्यास्थ चंद्रमा और वृषभ सूर्य के विशेष योग में स्नान का मुहूर्त है। अधिक पुरुषोत्तम मास में वैसे तो कोई पर्व नहीं आता है। लेकिन, ज्येष्ठ मास में अधिक मास पड़े तो दशहरा भी उसी में मनाने का आदेश ऋषि श्रृंगी ने हेमाद्रि संकल्प में दिया है।

भारत की संस्कृति में नदियां केवल जलधाराए ही नहीं बल्कि जीवन, आस्था और सभ्यता मानी गई है। इन्हीं में सर्वाधिक पूजनीय गंगा नदी है। जिनके धरती पर आने का पावन पर्व गंगा दशहरा है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाने वाला यह उत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान भी नहीं बल्कि भारतीय चेतना, श्रद्धा और आत्मशुद्धि का महान पर्व है।

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दीपदान का महत्व (Haridwar Ganga Dussehra)

धार्मिक मान्यता है कि दशहरा के दिन गंगा स्नान, दान, जप और पूजा करने से मनुष्य को 10 प्रकार के पाप नष्ट होते हैं। इस वजह से हरिद्वार सहित अन्य तीर्थ स्थलों पर वापस श्रद्धालु गंगा स्नान करते हैं। श्रद्धालु दीपदान करते हैं और गंगा आरती में भाग लेते हैं।

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