Laksar News: विधायक निधि घोटाला! कागजों में बनी सड़क हकीकत में गायब
Laksar News: हरिद्वार के लक्सर विधानसभा क्षेत्र में विधायक निधि के उपयोग को लेकर बड़ा वित्तीय अनियमित का मामला सामने आया है। मुख्य विकास अधिकारी डॉ ललित नारायण मिश्रा की तरफ से कराई गई स्थलीय जांच में दरगाह पुर में स्वीकृत सीसी सड़क निर्माण कार्य में गंभीर गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। जांच में बात सामने आई है कि सरकारी अभिलेखों में सड़क निर्माण कार्य पूरा दिखाया गया है। जबकि मौके पर वास्तविक स्थिति अलग मिली है। जांच रिपोर्ट के अनुसार संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कारण बताओं नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
शिकायत के बाद गठित हुई जांच टीम (Laksar News)
इस पूरे मामले की शुरुआत ग्राम दरगाह पुर निवासी कपिल कुमार द्वारा 23 जून 2025 को मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय में दी गई शिकायत से हुई है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विधायक निधि से स्वीकृत सीधी सड़क का निर्माण बिना कराए ही सरकारी रिकॉर्ड में काम पूरा दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया (laksar road scam) है। मुख्य विकास अधिकारी ने 4 जून 2026 को शिकायत की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त जांच टीम का गठन किया। इस टीम में जिला युवा कल्याण अधिकारी तथा जिला ग्राम में विकास अभिकरण के सहायक अभियंता अनिल जैन को शामिल किया गया। टीम ने 30 जून 2026 को अपनी विस्तृत जाट रिपोर्ट सौंप दी।
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नाप में मिला बड़ा अंतर
जांच के दौरान शिकायतकर्ता के आरोप सही मिले। इस रिपोर्ट के अनुसार, जिस स्थान पर चंद्रपाल सैनी के घर से राहुल सैनी के घर तक सीसी सड़क स्वीकृत थी। वाहन सड़क का निर्माण नहीं मिला। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क दूसरी दिशा में बनाई गई है। इसके बाद बड़ा खुलासा सड़क की लंबाई को लेकर मिला। सरकारी माप पुस्तिका में दो निर्माण कार्य की कुल लंबाई 205.50 मीटर दर्ज थी। जबकि संयुक्त जांच में दोनों सड़कों की वास्तविक लंबाई केवल 170 मी पाई गई। इसका मतलब रिकॉर्ड और वास्तविक निर्माण के बीच 35.50 मी का बड़ा अंतर मिला। जिसे जांच टीम ने गंभीर वित्तीय अनियमितता का संकेत माना है।
तीन अधिकारियों को भेजा नोटिस (Laksar Hindi News)
जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्य विकास अधिकारी ने तत्कालीन और वर्तमान जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कारण बताओं नोटिस जारी किया है। नोटिस पाने वालों में तत्कालीन प्रभारी खंड विकास अधिकारी पवन सिंह सैनी, तत्कालीन अपर सहायक अभियंता संदीप कुमार तथा तत्कालीन लेखाकार राजीव कुमार त्रिपाठी शामिल हैं। सीडीओ ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह अभिलेखीय साक्ष्यों सहित अपना पक्ष तत्काल कार्यालय में प्रस्तुत करें। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिलने की स्थिति में यह माना जाएगा कि संबंधित अधिकारियों के पास अपना पक्ष रखने के लिए कुछ नहीं है। इसके बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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इस पूरे मामले ने विधायक निधि से कराए जाने वाले विकास कार्यों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद प्रशासन दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की जिम्मेदारी किस पर तय होती है।

