उत्तराखंड

Chamoli: श्रमिकों की दास्तां सुन दहल जाएगा दिल, देवदूत बनकर आई सेना

Chamoli: जोशीमठ में शुक्रवार की सुबह श्रमिकों के लिए एक काली सुबह थी। सुबह से ही बर्फबारी के दौरान वातावरण में तेज आवाजें गूंज रही थी। जोशीमठ (Chamoli News) स्थित सेवा के चिकित्सालय पहुंचे श्रमिकों और कर्मचारियों के अनुसार सुबह उन्होंने कंटेनर के बाहर 6 फीट मोटी बर्फ की चादर बिछी हुई देखी थी। नजारा इतना भयानक था की कंटेनर के दरवाजे भी बर्फ से ढकने के लिए केवल 2 फीट ही बचे थे। 

कुछ श्रमिक पहले ही कंटेनर से बाहर निकल गए थे (Chamoli)

कंटेनर का दरवाजा बर्फ से ढकते हुए जब कुछ श्रमिकों ने देखा तो वह पास ही टीनशेड में जाकर उजाला होने का इंतजार करने लगे। इसी दौरान तेज हिमस्खलन हुआ लेकिन उसने कुछ नुकसान नहीं पहुंचा। लेकिन, दोबारा हिमस्खलन हुआ जिसकी वजह से हर तरफ तबाही का मंजर था। 

धमाके की आवाज से गूंजी पहाड़ी

उत्तरकाशी (uttarkashi avalanche) निवासी श्रमिक के अनुसार शुक्रवार सुबह उजाला होने से पहले जब वह कंटेनर से बाहर निकले तो पहाड़ी पर धमाकों की आवाज़ें गूंज रही थी। बर्फबारी के कारण कुछ नजर नहीं आ रहा था। जब तक वह कुछ सोचते या समझते तब तक बर्फ के पहाड़ ने पूरे इलाके को समेट लिया था। 

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बर्फ में दब गया था कंटेनर का दरवाजा

श्रमिकों को कंटेनर के हिलने का आभास हुआ तो उनकी नींद टूट गई। लेकिन, उस दौरान कंटेनर बर्फ से दबा हुआ था, जिस वजह से उसका दरवाजा नहीं खुला। इसी दौरान देवदूत बनते हुए सीआरपीएफ और आईटीबीपी (itbp) के जवानों ने आवाज लगाई। वह सभी को हौसला बनाए रखने के लिए कह रहे थे। जब सीआरपीएफ (crpf) ने बर्फ हटाकर उन्हें कंटेनर से बाहर निकाला, तब पता लगा कि वह कैंप से 50 मीटर नीचे पहुंच चुके हैं। 

कंटेनर का कोई पता नहीं

कुछ श्रमिकों का कहना है कि जिस कंटेनर में वह रह रहे थे उस कंटेनर का कोई पता नहीं चल पाया है। जब पहली गर्जना के साथ हिमखंड टूटा तो कुछ श्रमिक (mana village avalanche) कंटेनर से बाहर आ गए। इसके बाद दोबारा हिमखंड टूटा और जिस कंटेनर में श्रमिक रह रहे थे, वह कहां चला गया उसका पता ही नहीं चला। बर्फ के साथ वह कंटेनर भी कहीं दूर जाकर गिर गया।

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20 मीटर नीचे पहुंच कंटेनर

बर्फ श्रमिकों के कंटेनर को लुढ़का कर 20 मीटर नीचे ले गई। सभी श्रमिक गहरी नींद में थे, जब धमाके (uttarakhand news) के साथ कंटेनर 200 मीटर अलकनंदा नदी के किनारे पहुंच चुका था। उन्होंने कंटेनर को तोड़ दिया। हालांकि, कंटेनर में मौजूद सभी लोग शुरू में ही बाहर निकल कर सेना के कैंप तक पहुंच गए थे। जहां उन्हें उपचार दिया गया। 

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