Garud Puran: किसी के साथ क्रूर व्यवहार करने से पहले पढ़ें गरुण पुराण
Garud Puran: इस धरती पर प्रत्येक जीवित प्राणी की मृत्यु होना तय है। कई लोग लंबी आयु के बाद अपना शरीर त्यागते हैं। वही, कई बार ऐसा भी होता है कि बहुत कम आयु में इंसान सृष्टि को अलविदा कह देता है। मनुष्य का जीवन चार अवस्थाओं से मिलकर बना होता है। पहले शिशु, दूसरा किशोर, तीसरा प्रौढ़ और चौथा वृद्धावस्था होता है।
क्या होती है अकाल मृत्यु? (Garud Puran)
हिंदू पुराणों के अनुसार मनुष्य जिनकी मौत समय से पहले हो जाती है। शरीर त्यागने के बाद भी जिनके आत्मा इस लोक का त्याग नहीं करती बल्कि अपना जीवनकाल पूरा करने के लिए इस धरती पर बनी रहती है। उसे अकाल मृत्यु कहा जाता है।
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इस वजह से होती है अकाल मृत्यु
गरुण पुराण के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति की मौत एक्सीडेंट, आग में जलकर, पानी में डूब कर, सांप काटने से, किसी जंगली जानवर के घातक हमले से या आत्महत्या से होती है तो उसे अकाल मृत्यु कहा जाता है। मनुष्य अपने पिछले जन्म के शुभ या अशुभ कर्मों का फल लेकर नए जन्म में आता है। इस कर्म संबंध के कारण उसे अचानक विपत्तियां घेर लेती है। जब नए जन्म में भी मनुष्य के पाप का घड़ा भर जाता है। तो व्यक्ति की जानकारी के बिना ही काल उसे सांप की तरह डस लेता है।
गरुड़ पुराण के कर्म विपाक में जानकारी (Garud Puran Facts)
गरुड़ पुराण के कर्म विपाक एम में साफ तौर पर लिखा है कि, जो व्यक्ति दूसरों के साथ क्रूरता और अन्याय करता है। उसकी स्वयं की मृत्यु भी क्रूर तरीके से होती है। जो किसी के घर या जंगल में आग लगाता है वह भी अगले जन्म में अग्नि में जलाया जाता है।
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हिंसा जानवरों की तरह व्यवहार
जो दूसरों को जहर देता है या हिंसक जानवरों की तरह व्यवहार करता है। वह अगले जन्म में सांप काटने से, चोर डाकुओं के द्वारा हत्या या जंगल में शेर आदि हिंसक जानवरों के द्वारा आकर मौत मरता है। गरुड़ पुराण के अनुसार अकाल मौत मरने वाली आत्माएं भूत प्रेत बनकर भटकती रहती है। जिनकी शांति और उद्धार के लिए परिजनों को खासतौर से नारायण बलि का अनुष्ठान जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है और वह पापों से मुक्त होकर स्वर्ग को प्राप्त होती है।

