Sawan Shivratri Katha: आज जरूर करें यह कथा! मिलेगा दुगुना लाभ
Sawan Shivratri Katha: सावन का महीना सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इसी तरह से हर साल सावन में आने वाली शिवरात्रि शिव भक्त बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। यह दिन पूरी तरह से भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित होता है। ऐसा कहा जाता है कि सावन की शिवरात्रि के दिन व्रत रखने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और जीवन में खुशहाली आती है।
सावन शिवरात्रि व्रत कथा (Sawan Shivratri Katha)
अगर कोई भी व्यक्ति आज के दिन कठिन उपवास का पालन कर रहा है। तो उन्हें आज के दिन की व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। सावन शिवरात्रि व्रत कथा-
एक नगर में अमीर साहूकार रहता था। उस साहूकार के कोई संतान नहीं थी जिस वजह से वह बहुत दुखी रहता था। वह हर सोमवार भोलेनाथ की विधिवत पूजा करता था और शाम के समय मंदिर में जाकर भगवान शिव के सामने दीपक जलाता था। यह सब वह संतान पाने के लिए कर रहा था। उसकी भक्ति को देखते हुए एक दिन माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा कि आप अपने इस सच्चे भक्त को संतान प्राप्ति का वरदान क्यों नहीं देते हैं। तब भगवान भोलेनाथ ने कहा कि साहूकार को पिछले जन्म के कर्मों के संतान की प्राप्ति नहीं हो रही।
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माता पार्वती जी ने फिर शिव जी से आग्रह (Sawan Shivratri Katha) किया कि वह साहूकार को संतान प्राप्ति का वर दें। माता पार्वती के कहने पर भगवान भोलेनाथ ने साहूकार के सपने में आकर उसे संतान प्राप्ति का वरदान दिया। लेकिन यह भी कहा कि तुम्हारे पुत्र की आयु कम होगी और वह केवल 16 साल तक की जीवित रहेगा।
सावन शिवरात्रि की पूरी व्रत कथा (Sawan Shivratri 2025)
यह बात सुनकर साहूकार खुश हुआ लेकिन साथ ही संतान को कुछ समय बाद खोने के विचार से चिंतित भी हो गया। उसने सारी बात अपनी पत्नी को बताई। कुछ समय बाद साहूकार की पत्नी गर्भवती हो गई और उसने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया। दोनों ने अपने पुत्र का नाम अमर रखा। जब अमर 11 साल का हुआ था साहूकार ने उसे अपने मामा के साथ शिक्षा ग्रहण करने के लिए काशी भेज दिया। साहूकार ने अपने पुत्र को कहा की कुछ धन ले जाओ और रास्ते में ब्राह्मणों को भजन जरूर कराना।
इसके बाद दोनों मामा-भांजे यात्रा करते हुए विश्राम के लिए एक राज्य में रुके। वहां पर एक राजकुमार और राजकुमारी का विवाह हो रहा था। लेकिन वह राजकुमार काणा था और यह बात किसी को पता नहीं थी। राजकुमार के पिता को इस बात की चिंता हुई कि अगर राजकुमारी को यह पता चल गया तो वह विवाह नहीं करेगी। तब उस राजकुमार के पिता ने साहूकार के पुत्र को देखकर उसे राजकुमार की जगह मंडप में बैठने का आग्रह किया।
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अमर ने उस राजा की बात मान ली और मंडप में बैठ गया इस तरह राजकुमारी का विवाह अमर से हो गया। विवाह के बाद बालक ने अपने मामा के साथ काशी जाने का निर्णय लिया और जाते-जाते अपनी राजकुमारी को सारी बात बता दी। जिस वजह से राजकुमारी ने राजकुमार के साथ जाने से मना कर दिया।
कुछ समय बाद हो गई मृत्यु (Sawan Shivratri Puja)
कुछ समय बाद बालक 16 साल का हो गया। उसके मामा ने एक जगह यज्ञ का आयोजन किया और यज्ञ के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराया और दान-दक्षिणा दी। इसके बाद बालक की तबयत खराब हो गई और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गया। इस दौरान उसकी मृत्यु हो गई और उसकी मामा जोर जोर से रोने लगा। इस समय भगवान शिव और माता पार्वती उस रास्ते से जा रहे थे। तब माता पार्वती ने शिव जी से आग्रह किया कि वह उस व्यक्ति का कष्ट दूर करें।
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भगवान शिव ने माता पार्वती (Sawan Shivratri Puja Vidhi) को सारी बात बताई। तब माता पार्वती ने कहा कि इस बालक का पिता पिछले 16 सालों से सोमवार का व्रत करता है और आपके समक्ष दीप जलाता है। इसलिए आप इसके दुखों को दूर करें। माता पार्वती की बात सुनकर भगवान शिव ने अमर को जीवनदान दिया। यह देखकर उसके मामा खुश हुए और दोनों काशी से वापस घर जाने लगे तो रास्ते में उन्हें वही राजकुमारी मिली जिससे अमर का विवाह हुआ था।
भगवान शिव ने दिया जीवनदान
राजकुमारी अमर को देखकर पहचान गई और राजा ने भी खुश होकर अपनी पुत्री को अमर के साथ विदा कर दिया। दूसरी और साहूकार और उसकी पत्नी है सोच कर दुखी थी कि 16 वर्ष के बाद उनका पुत्र उन्हें छोड़कर (Sawan Shivratri Vrat Katha) चला जाएगा। लेकिन जब उन्होंने देखा कि उनका पुत्र अपनी वधू के साथ सुरक्षित घर आ रहा है तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस तरह से भगवान शिव की निरंतर पूजा से साहूकार को न केवल पुत्र की प्राप्ति हुई बल्कि उसे जीवन दान भी मिला।

