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Haridwar Politics: हरिद्वार विधानसभा सीट पर घटी मतदान की संख्या चिंताजनक विषय

Haridwar Politics: उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण सीटों में से एक हरिद्वार विधानसभा है। जिसका राजनीतिक और सामाजिक मिजाज हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से हरिद्वार सीट का एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर ट्रेंड सामने आया है। पिछले एक दशक में जहां हरिद्वार में मतदाताओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं दूसरी तरफ वोटिंग प्रतिशत में लगातार गिरावट भी देखी जा रही है। यह राजनीतिक विश्लेषकों के लिए बहुत बड़ा सवाल खड़ा करती है।

मतदाताओं में 22% से अधिक की वृद्धि (Haridwar Politics)

अगर हम साल 2012 से लेकर साल 2022 तक के आकड़ों पर नजर डालें तो हरिद्वार विधानसभा में मतदाताओं की संख्या लगातार बड़ी है। साल 2012 में यहां कुल मतदाताओं की संख्या 12,16,693 थी। जो 2027 में बढ़कर 1,43,519 हो गई। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में यह आंकड़ा 1,49,219 तक पहुंच गया। जिससे साफ पता चलता है कि इन 10 वर्षों में हरिद्वार में कुल 27,550 नए मतदाता जुड़े हैं। जो की कुल मतदाताओं में 22.63% की एक शानदार और बड़ी वृद्धि को दर्शा रहा है।

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चिंता का विषय बना मतदान प्रतिशत गिरना

एक तरफ जहां नए और युवा वोटर (haridwar news) की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं दूसरी और मतदान के प्रति लोगों का उत्साह भी कम होता नजर आ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2012 में हरिद्वार में 67.82% मतदान हुआ था। 2017 में मतदाताओं की संख्या बढ़ाने के बावजूद मतदान का प्रतिशत गिरकर 65.27% रह गया। देखते ही देखते 2022 में यह आंकड़ा और नीचे खिसककर 64.99% पर आ गया। कुल मिलाकर देखा जाए तो 2012 से 2022 के बीच मतदान प्रतिशत में 2.83% की गिरावट आई है। जो लोकतंत्र के लिए एक बेहद चिंताजनक संकेत है।

इस गिरावट के मुख्य कारण क्या है? (Haridwar Politics News)

इस विरोधाभास के पीछे कई कारण हो सकते हैं

सबसे पहला कारण स्थानीय स्तर पर रोजगार या शिक्षा के लिए युवाओं का पलायन हो सकता है। जिसके कारण उनका नाम तो वोटर लिस्ट में है लेकिन वह वोटिंग के दिन मौजूद नहीं रहते।

दूसरा कारण शहरी क्षेत्र में देखे जाने वाली वोटिंग उदासीनता भी हो सकती है। जहां लोग छुट्टी के दिन वोट देने की जगह घर पर रहना पसंद करते हैं।

इसके अलावा सबसे बड़ा कारण यह भी है कि स्थानीय मुद्दों पर जनता की निराशा भी कई बार उन्हें पोलिंग बूथ तक जाने से रोक देती है।

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विधानसभा चुनाव 2027 के लिए बड़ा सवाल

यह आंकड़े साफ तौर पर संकेत दे रहे हैं कि हरिद्वार की मतदाता शक्ति तो बढ़ रही है। लेकिन, उसका सही से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में हरिद्वार (Haridwar Politics News) की जनता जागरूक होगी? क्या यह बड़ी हुई मतदाता शक्ति इस बार भारी मतदान में बदलेगी? यह देखना दिलचस्प की बात है। क्योंकि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब हर एक मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग करता है।

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