Haridwar: CDO ललित नारायण मिश्रा ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर दिए निर्देश
Haridwar: हरिद्वार के मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहां है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा। इस मामले में उन्होंने 6 जुलाई 2026 को खंड विकास अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ बैठक की।
अधिकारियों को दिए महत्वपूर्ण निर्देश (Haridwar)
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने जिले के सभी खंड विकास अधिकारियों और सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को स्वीकृत करने को लेकर सक्रियता से काम करने को कहा गया है। सोमवार को हुई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खंड विकास अधिकारियों की बैठक के दौरान उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अनुपालन करना जरूरी होगा।
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कूड़ा जमा करने का सुरक्षित स्थान
मुख्य विकास अधिकारी (CDO Lalit Narayan Mishra) ने निर्देशों में विशेष रूप से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से जारी किए गए दिशा निर्देशों के अनुपालन पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि सभी खंड विकास अधिकारियों और सहायक विकास अधिकारी पंचायत को अपने अपने विकास करो में ऐसे स्थानों की पहचान करनी होगी जहां सुरक्षित तरीके से कूड़ा जमा किया जा सके। साथ ही सभी ग्राम पंचायत को भी यह निर्देश दिए हैं कि वह प्लास्टिक या अन्य अपशिष्ट की पहचान करें और उन्हें भी प्रबंधन के दायरे में लाएं। इसके अलावा प्रशासन न केवल सामान्य पूर्ण के निस्तारण को लेकर गंभीर है बल्कि विशेष प्रकार के अपशिष्ट जैसे की प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। इन अपशिष्ट को सुरक्षित तरीके से संग्रह किया जाएगा उसे निस्तारण के लिए जल्दी ग्राम पंचायत को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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क्या होगी आगे की प्रक्रिया? (Haridwar News)
सभी ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वे एक विस्तृत एक्शन प्लान (कार्य योजना) तैयार करें। इस एक्शन प्लान को मुख्यालय पर स्थित स्वच्छता कंट्रोल रूम को प्रस्तुत करना होगा। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया व्यवस्थित और निगरानी योग्य हो। स्वच्छता कंट्रोल रूम इन योजनाओं की समीक्षा करेगा और उनके कार्यान्वयन की प्रगति पर नजर रखेगा। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि निर्देशों का प्रभावी कार्यान्वयन कई चुनौतियों से भरा हो सकता है, जिसमें जन जागरूकता की कमी, संसाधनों का अपर्याप्त आवंटन और ग्राम स्तर पर कार्यान्वयन की क्षमताएं शामिल हैं। इनके संबंध में भी रिपोर्ट मांगी गई है।

