Haridwar Diwali: हरिद्वार में 50 लोगों को दिया गया माटीकला का प्रशिक्षण

Haridwar Diwali: दीपावली पर घरों को रोशन करने वाले मिट्टी के दीये अब स्थानीय महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार का जरिया भी बन रहे हैं। हरिद्वार जिले में पारंपरिक माटीकला को बढ़ावा देने और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए माटीकला बोर्ड की ओर से विशेष पहल की जा रही है। इसके तहत मिट्टी के दीये और आकर्षक मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

अब तक 50 लोगों को मिला प्रशिक्षण (Haridwar Diwali)
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की पहल पर ग्राम्य विकास विभाग के माध्यम से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और रीप परियोजना के सहयोग से यह काम आगे बढ़ाया जा रहा है। रुड़की में लिथोप्रेस के पास महिलाओं और पुरुषों को मिट्टी के दीये और मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
माटीकला बोर्ड के उपाध्यक्ष शोभाराम प्रजापति के अनुसार, प्रत्येक दो महीने में 25 लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 50 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षित लोगों को दीये बनाने वाली मशीनें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे अपना काम शुरू कर सकें और नियमित आमदनी कर सकें।
उत्पादों की पैकेजिंग और बाजार पर भी ध्यान
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने बताया कि मिट्टी के दीये और मूर्तियों को आकर्षक रूप देने के साथ उनकी पैकेजिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बाजार में बेहतर पहचान दिलाना और ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाना है।
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उन्होंने कहा कि माटीकला हमारी पुरानी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। इसे बचाने के साथ कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूत करना भी जरूरी है। इस पहल के जरिए ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को अपने हुनर को रोजगार में बदलने का अवसर मिल सकता है।
दीपावली पर स्थानीय दीये खरीदने की अपील (Haridwar News)
सीडीओ ने लोगों से अपील की कि दीपावली पर घरों और प्रतिष्ठानों को सजाने के लिए स्थानीय कुम्हारों द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीये और मूर्तियां खरीदें। इससे पारंपरिक कला को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय कारीगरों की आमदनी में भी सहयोग मिलेगा।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के प्रयासों से जुड़ी है।
