Haridwar: विरोध के बाद ‘जनसंवाद’ की राह पर मेला प्रशासन

Haridwar: अर्धकुंभ के आयोजन में अब कुछ ही महीने शेष हैं। इसी बीच मेला प्रशासन की ओर से व्यापारियों, स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद और बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ है।

इसे प्रशासन की ओर से एक सकारात्मक पहल माना जा सकता है, लेकिन इस बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जनता की समस्याओं पर चर्चा के लिए विरोध और सवाल उठने का इंतजार क्यों करना पड़ा?
विकास कार्यों के बीच स्थानीय लोगों की परेशानियां (Haridwar)
अर्धकुंभ की तैयारियों के तहत हरिद्वार में विभिन्न विकास कार्य किए जा रहे हैं। सड़कों की खुदाई, यातायात व्यवस्था, पार्किंग, जल निकासी और निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार समस्याएं सामने आती रही हैं। इनका असर स्थानीय व्यापारियों और रोजमर्रा आने-जाने वाले लोगों पर भी पड़ रहा है।
यह भी पढ़ें: Haridwar: विभागों-कार्यालयों के सार्वजनिक शौचालयों का होगा निरीक्षण
मेला प्रशासन की ओर से करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं और स्वीकृत कार्यों की जानकारी दी जा रही है। ऐसे में स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि इन योजनाओं का असर जल्द जमीन पर दिखाई दे और निर्माण कार्यों के साथ आम लोगों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाए।
सिर्फ बैठक नहीं, समाधान भी जरूरी
व्यापारी और स्थानीय नागरिक लंबे समय से शहर की व्यवस्थाओं का हिस्सा हैं। अर्धकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या हरिद्वार पहुंचेगी, ऐसे में स्थानीय व्यवस्था का सुचारु होना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता पं. कपिल शर्मा जौनसारी का कहना है कि जनसंवाद शुरू होना अच्छी पहल है, लेकिन यह केवल बैठक और फोटो तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर जिम्मेदारी तय करने के साथ उनकी समयसीमा भी निर्धारित होनी चाहिए और कार्यों की सार्वजनिक जानकारी दी जानी चाहिए।
विरोध के बाद संवाद या पहले से संवाद? (Haridwar News)
अब सवाल यही है कि शुरू हुआ यह जनसंवाद कितना प्रभावी साबित होता है। जनता की उम्मीद है कि बैठकों में उठने वाले मुद्दों पर ठोस और समयबद्ध कार्रवाई होगी।
