Haridwar News: क्या वोटरों के नाम काटने की हो रही कोशिश? उठे बड़े सवाल!
Haridwar News: हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विधायक अनुपमा रावत ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से दुरुपयोग कर मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है।
नाम हटाने की कोशिश का आरोप (Haridwar News)
विधायक अनुपमा रावत के अनुसार 6 अगस्त 2026 को हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म-7 भरकर एक मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई। उनका दावा है कि संबंधित मतदाता पहले ही अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुका था और उसके नाम पर फॉर्म 7 का इस्तेमाल किया गया।
अनुपम रावत ने इसे फॉर्म 7 के संभावित दुरुपयोग का मामला बताते हुए हरिद्वार ग्रामीण के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को इस तरह के प्रयासों को रोकने और फॉर्म साथ का गलत इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए ज्ञापन देने की बात कही है।
सैकड़ो नाम हटाने की कोशिश का दावा
उन्होंने बताया कि 7 अगस्त को 126, 8 अगस्त को 426 और 9 अगस्त को 331 मतदाताओं के नाम फॉर्म 7 के माध्यम से मतदाता सूची से हटाने की कोशिश किए जाने की जानकारी सामने आई है। उनका कहना है कि संबंधित मतदाताओं के बारे में जांच करने पर ऐसे कई मामले सामने आए जहां मतदाताओं ने अपने-अपने भाग में मतदान किया है और वह दूसरे स्थान पर मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं है। उन्होंने इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच किए जाने की मांग की है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि फॉर्म साथ किन परिस्थितियों में और किन लोगों द्वारा दाखिल किए गए।
एक व्यक्ति द्वारा कई फॉर्म-7 इस्तेमाल करने का आरोप
अनुपमा रावत ने कुछ उदाहरण भी सामने रखे हैं। उनके अनुसार, जोगेन्द्र सिंह ने 11 फॉर्म-7, गुरुराज सिंह ने 7 फॉर्म-7 और आर्य यादव ने भी 7 फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि फॉर्म-10 का अवलोकन करने पर ऐसे मामलों की पहचान की जा सकती है, जहां एक ही व्यक्ति द्वारा बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन किए गए हैं।
फॉर्म-10 पर नोटिस की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल (Haridwar News Today)
विधायक अनुपमा रावत ने यह भी आरोप लगाया कि अभी तक कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर फॉर्म-10 सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के मतदाता मैन्युअल का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में फॉर्म-10 को नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए और संबंधित मतदाता को भी नोटिस दिया जाना चाहिए।
उनका आरोप है कि पहले की प्रक्रियाओं में जिन मतदाताओं के नाम एनएसडीवीडी के कारण हटाए गए थे, उनके फॉर्म-10 नोटिस बोर्ड पर लगाए गए थे और मतदाताओं को नोटिस भी भेजे गए थे। अनुपमा रावत के मुताबिक, इस बार भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
BLO और अधिकारियों से जांच की मांग
अनुपमा रावत ने हरिद्वार ग्रामीण के BLO-01 तवरेज आलम के साथ अन्य BLO और मतदाताओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि शिकायतों की जांच के लिए संबंधित भाग की BLO समिति बनाई जाए और यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो फॉर्म-7 पर की गई कार्रवाई को निरस्त कर मतदाता का नाम संबंधित मतदाता सूची में यथावत रखा जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि फॉर्म-7 में दर्ज आपत्तिकर्ताओं के EPIC नंबर और मोबाइल नंबर की जांच की जाए तथा शिकायतें सही पाए जाने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31(43) के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
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जिला निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन की चेतावनी
विधायक ने कहा है कि यदि फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो वह जिला मतदाता रजिस्ट्रीकरण अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी, हरिद्वार के कार्यालय में धरना देने की चेतावनी देंगी। उन्होंने कहा कि मामले की शिकायत भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त तक भी भेजी गई है।
हालांकि, ये आरोप विधायक अनुपमा रावत और उनके साथ मौजूद लोगों द्वारा लगाए गए हैं। फॉर्म-7 के दुरुपयोग और मतदाता सूची से नाम हटाने के संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।

